“बचपन से ही शौक था अच्छा इंसान बनने का,
लेकिन बचपन खत्म और शौक भी खत्म।”



  “समझ मे आया तो अच्छा है
वरना तू अभी बच्चा है।”



  “ख़ामोशी का अपना एक अलग ही मज़ा है,
पेड़ो की जड़ें फड़फड़ाया नहीं करती दोस्त।”



  “दुनियाँ में अगर कुछ छोड़ने जैसा है
तो दुनियाँ से उम्मीद करना छोड़ दो।”



  “नफरत भी हम हैसियत देख कर करते है..
प्यार तो बहुत दूर की बात है”



  “भरे बाजार से अक्सर खाली हाथ लौट आता हूँ,
पहले पैसे नहीं थे, अब ख्वाहिश नहीं है”



  “जीने का असली मजा तो तब है दोस्तों,
जब दुश्मन भी तुमसे हाथ मिलाने को बेताब रहे।”



  “हम आज भी शतरंज़ का खेल
अकेले ही खेलते हैं
क्यूंकि दोस्तों के खिलाफ चाल
चलना हमे आता नही!!”





  “हम दुश्मनों को भी बड़ी शानदार सज़ा देते हैं,
हाथ नहीं उठाते बस नज़रों से गिरा देते हैं।”



  “कमियाँ तो बहुत हैं मुझमें…
साला कोई निकाल के तो देखे।”



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